
सहारनपुर पुलिस की नशे के खिलाफ सराहनीय पहल: ‘ऑपरेशन सवेरा 2.0’ के तहत गांव–गांव, शहर–शहर जागरूकता अभियान, बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश
सहारनपुर। नशे के बढ़ते खतरे के खिलाफ सहारनपुर पुलिस ने एक बार फिर समाज को सही दिशा देने की मजबूत पहल की है। डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी के कुशल निर्देशन में जिलेभर में “ऑपरेशन सवेरा” अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी अब 2.0 श्रृंखला की शुरुआत कर दी गई है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल नशा करने वालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक कर नशे की जड़ पर प्रहार करना है। ऑपरेशन सवेरा 2.0 के अंतर्गत गांवों और शहरों में चौपालों का आयोजन किया जा रहा है, जहां आम जनता को विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को यह समझाया जा रहा है कि नशा किस तरह व्यक्ति, परिवार और पूरे समाज को बर्बादी की ओर धकेल देता है।
पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लोगों को बताया जा रहा है कि नशा केवल स्वास्थ्य ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि मानसिक संतुलन, पारिवारिक रिश्ते, आर्थिक स्थिति और भविष्य—all कुछ तबाह कर देता है। कई परिवार नशे की लत के कारण पूरी तरह उजड़ जाते हैं, जिसे समय रहते रोका जाना बेहद जरूरी है।
इसी कड़ी में देहात कोतवाली क्षेत्र की शेखपुरा चौकी में चौकी प्रभारी नरेंद्र भड़ाना द्वारा क्षेत्र में मुनादी कराकर नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी गई और अपने बच्चों को नशे से दूर रखने की अपील की गई।
ग्रामीणों ने पुलिस की इस पहल की खुले दिल से सराहना की और कहा कि यदि पुलिस इसी तरह समाज को जागरूक करने का कार्य करती रही, तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को नशे जैसी घातक बुराई से बचाया जा सकता है।
सहारनपुर पुलिस का यह प्रयास यह भी दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी पुलिस अग्रणी भूमिका निभा रही है। ऑपरेशन सवेरा 2.0 के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
नशा मुक्त समाज की दिशा में सहारनपुर पुलिस की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
🔥 रिपोर्ट: एलिक सिंह
✍️ संपादक: Vande Bharat Live TV News
🗞️ ब्यूरो चीफ: दैनिक आकांशा बुलेटिन, सहारनपुर
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🟥 जहाँ पुलिस केवल डंडा नहीं, समझ भी बनती है




